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तुलसी के जबरदस्त नुस्खे !!
Tulsi ke Upyog

तुलसी के लाभ , तुलसी के बीज का औषधीय उपयोग !!

भारत के हर हिस्से में तुलसी के पौधे को प्रचुरता से उगता हुआ देखा जा सकता है। इसका पौधा बड़ा वृक्ष नहीं बनता, केवल ड़ेढ़ या दो फुट तक बढ़ता है। तुलसी को हिन्दु संस्कृति में अतिपूजनीय पौधा माना गया है। माता तुल्य तुलसी को आंगन में लगा देने मात्र से अनेक रोग घर में प्रवेश नहीं करते हैं और यह हवा को भी शुद्द बनाने का कार्य करती है। तुलसी का वानस्पतिक नाम ओसीमम सैन्कटम है। आदिवासी भी तुलसी को अनेक हर्बल नुस्खों में अपनाते हैं


तुलसी के बहुत सारे औषधीय गुण हैं उनमे से कुछ औषधीय गुण  नीचे बताये गएँ हैं::

1. आदिवासियों द्वारा शिवलिंगी के बीजों को तुलसी और गुड़ के साथ पीसकर नि:संतान महिला को खिलाया जाता है, महिला को जल्द ही संतान सुख की प्राप्ति होती है।
2. औषधीय गुणों से भरपूर तुलसी के रस में थाइमोल तत्व पाया जाता है जिससे त्वचा के रोगों में लाभ होता है। पातालकोट के आदिवासी हर्बल जानकारों के अनुसार तुलसी के पत्तों को त्वचा पर रगड़ दिया जाए तो त्वचा पर किसी भी तरह के संक्रमण में आराम मिलता है।
3. किडनी की पथरी में तुलसी की पत्तियों को उबालकर बनाया गया काढ़ा शहद के साथ नियमित 6 माह सेवन करने से पथरी मूत्र मार्ग से बाहर निकल आती है।
4. दिल की बीमारी में यह वरदान साबित होती है क्योंकि यह खून में कोलेस्ट्राल को नियंत्रित करती है। जिन्हें हॄदयाघात हुआ हो, उन्हें तुलसी के रस का सेवन नियमित रूप से करना चाहिए। तुलसी और हल्दी के पानी का सेवन करने से शरीर में कोलेस्ट्राल की मात्रा नियंत्रित रहती है और इसे कोई भी स्वस्थ वयक्ति सेवन में ला सकता है।
5. इसकी पत्तियों का रस निकाल कर बराबर मात्रा में नींबू का रस मिलायें और रात को चेहरे पर लगाये तो झाईयां नहीं रहती, फुंसियां ठीक होती है और चेहरे की रंगत में निखार आता है।
6. फ्लू रोग तुलसी के पत्तों का काढ़ा, सेंधा नमक मिलाकर पीने से ठीक होता है। डाँग- गुजरात में आदिवासी हर्बल जानकार फ्लु के दौरान बुखार से ग्रस्त रोगी को तुलसी और सेंधा नमक लेने की सलाह देते हैं।
7. "माइग्रेन" के निवारण में मदद मिलती है। प्रतिदिन दिन में 4-5 बार तुलसी से 6-8 पत्तियों को चबाने से कुछ ही दिनों में माईग्रेन की समस्या में आराम मिलने लगता है।
8. पातालकोट के आदिवासी हर्बल जानकार तुलसी को थकान मिटाने वाली एक औषधि मानते है, इनके अनुसार अत्यधिक थकान होने पर तुलसी के पत्तियों और मंजरी के सेवन से थकान दूर हो जाती है।
9. आदिवासी अंचलों मे पानी की शुध्दता के लिए तुलसी के पत्ते जल पात्र में डाल दिए जाते है और कम से कम एक सवा घंटे पत्तों को पानी में रखा जाता है। कपड़े से पानी को छान लिया जाता है और फ़िर यह पीने योग्य माना जाता है।
10. गर्मियों में घमौरियाँ के इलाज के लिए डाँग- गुजरात के आदिवासी संतरे के छिलकों को छाँव में सुखाकर पाउडर बना लेते है और इसमें थोड़ा तुलसी का पानी और गुलाबजल मिलाकर शरीर पर लगाते है, ऐसा करने से तुरंत आराम मिलता है।
11. शीघ्र पतन एवं वीर्य की कमी ---- तुलसी के बीज 5 ग्राम रोजाना रात को गर्म दूध के साथ लेने से समस्या दूर होती है
12. नपुंसकता---- तुलसी के बीज 5 ग्राम रोजाना रात को गर्म दूध के साथ लेने से नपुंसकता दूर होती है और यौन-शक्ति में बढ़ोत्तरी होती है।
13. मासिक धर्म में अनियमियता------ जिस दिन मासिक आए उस दिन से जब तक मासिक रहे उस दिन तक तुलसी के बीज 5-5 ग्राम सुबह और शाम पानी या दूध के साथ लेने से मासिक की समस्या ठीक होती है और जिन महिलाओ को गर्भधारण में समस्या है वो भी ठीक होती है
14. तुलसी के पत्ते गर्म तासीर के होते है पर सब्जा शीतल होता है . इसे फालूदा में इस्तेमाल किया जाता है . इसे भिगाने से यह जैली की तरह फूल जाता है . इसे हम दूध या लस्सी के साथ थोड़ी देशी गुलाब की पंखुड़ियां डाल कर ले तो गर्मी में बहुत ठंडक देता है .इसके अलावा यह पाचन सम्बन्धी गड़बड़ी को भी दूर करता है तथा यह पित्त घटाता है |
15. यदि आपके शरीर के किसी हिस्से में फोड़े हो गए हों तो सुखी तुलसी के पत्तों का बारीक चूर्ण बना लें। इस चूर्ण को फोड़े वाले हिस्सों पर पाउडर की तरह छिड़कने पर फोड़े ठीक हो जाते हैं
16. तुलसी के पौधों के नीचे की मिट्टी को शरीर पर मलने से त्वचा रोगों में लाभ मिलता है
17. तुलसी के पत्तों का रस आँखों में डालने से लाभ मिलता है। इसलिए आँखों की बहुत सी दवाइयों में तुलसी के पत्तों का रस मिलाया जाता है।
18. यदि नाक के भीतर फुंसी हो, तो तुलसी पत्तों को बारीक पीसकर सुंघिये। इससे लाभ मिलेगा।
19. तुलसी के पत्तों और काली मिर्च को पीसकर और मिलाकर चूर्ण बना लें। इस चूर्ण को दांतों के नीचे रखने से दांत का दर्द दूर हो जाता है।
20. जिन लोगों को श्वास से सम्बन्धित बीमारी होती है। उन्हें तुलसी के पत्तों के साथ चुटकी भर काला नमक मुंह में रखकर चुसना चाहिए। इससे श्वास रोगियों को लाभ मिलता है।
21. बालों का टूटना या फिर बालों का कम उम्र में ही सफ़ेद हो जाना, इस तरह की परेशानियों में तुलसी काफी लाभ पहुंचाती है। तुलसी के पत्तों और आंवले को बारीक पीस लें फिर इसे मिला लें। अब इसे बालों पर मलें, बालों पर मलने से बालों का गिरना या बालों का असमी सफ़ेद होना रुक जाता है।यह पेस्ट डेढ़ महीने तक हर हफ्ते में तीन दिन बालों पर मलें।
22. तुलसी के पत्तों का लेप बनाकर चेहरे पर लगाने से चेहरे में निखार आता है
 23 तुलसी के पत्तों का लेप सर पर लगाने से सिर दर्द में आराम मिलता है

Treatment for CoughBest way to cure Cough at home !!


For severe cough, mix tulsi juice with garlic juice and honey.
A teaspoon of this mixture is taken once every three hours will treat excessive coughing.

तुलसी  के घरेलू नुस्खे !! 


तुलसी की २१ से ३५ पत्तियाँ स्वच्छ खरल या सिलबट्टे (जिस पर मसाला न पीसा गया हो) पर चटनी की भांति पीस लें और १० से ३० ग्राम मीठी दही में मिलाकर नित्य प्रातः खाली पेट तीन मास तक खायें। ध्यान रहे दही खट्टा न हो और यदि दही माफिक न आये तो एक-दो चम्मच शहद मिलाकर लें। छोटे बच्चों को आधा ग्राम दवा शहद में मिलाकर दें। दूध के साथ भुलकर भी न दें। औषधि प्रातः खाली पेट लें। आधा एक घंटे पश्चात नाश्ता ले सकते हैं। दवा दिनभर में एक बार ही लें परन्तु कैंसर जैसे असह्य दर्द और कष्टप्रद रोगो में २-३ बार भी ले सकते हैं।

इसके तीन महीने तक सेवन करने से खांसी, सर्दी, ताजा जुकाम या जुकाम की प्रवृत्ति, जन्मजात जुकाम, श्वास रोग, स्मरण शक्ति का अभाव, पुराना से पुराना सिरदर्द, नेत्र-पीड़ा, उच्च अथवा निम्न रक्तचाप, ह्रदय रोग, शरीर का मोटापा, अम्लता, पेचिश, मन्दाग्नि, कब्ज, गैस, गुर्दे का ठीक से काम न करना, गुर्दे की पथरी तथा अन्य बीमारियां, गठिया का दर्द, वृद्धावस्था की कमजोरी, विटामिन ए और सी की कमी से उत्पन्न होने वाले रोग, सफेद दाग, कुष्ठ तथा चर्म रोग, शरीर की झुर्रियां, पुरानी बिवाइयां, महिलाओं की बहुत सारी बीमारियां, बुखार, खसरा आदि रोग दूर होते हैं।

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